भुगतान छूट जाए तो क्या होता है
अगर कोई EMI नियत तारीख़ पर पूरी नहीं चुकाई जाती, तो आपका लोन खाता ओवरड्यू माना जाता है। अगर वह ओवरड्यू बना रहे, तो RBI के नियमों के अनुसार हमें उसे विशेष उल्लेख खाता (SMA) और फिर अनर्जक परिसंपत्ति (NPA) के रूप में वर्गीकृत करना होता है। यह पेज हर चरण को उदाहरणों के साथ समझाता है।
ओवरड्यू की तारीख़
आपके लोन की कोई भी देय राशि, चाहे मूलधन हो, ब्याज हो या कोई शुल्क, अगर नियत तारीख़ तक नहीं चुकाई जाती तो वह ओवरड्यू है। जिस तारीख़ को वह देय थी, वही ओवरड्यू की तारीख़ है।
EMI का कुछ हिस्सा चुकाने से खाता ओवरड्यू होने से नहीं बचता। पूरी देय राशि चुकाए जाने तक खाता ओवरड्यू रहता है।
उदाहरण। रमेश की ₹36,000 की तिमाही EMI 15 जुलाई को देय है। वह 15 जुलाई को ₹30,000 चुकाते हैं। ₹6,000 अभी भी बाक़ी है, इसलिए उनका खाता 15 जुलाई से तब तक ओवरड्यू रहेगा जब तक वह ₹6,000 नहीं चुका देते।
SMA और NPA के चरण
वर्गीकरण इस पर निर्भर करता है कि सबसे पुरानी बकाया राशि कितने दिनों से लगातार ओवरड्यू है।
SMA और NPA की स्थिति क्रेडिट सूचना कंपनियों को बताई जाती है और इससे आपके क्रेडिट स्कोर और भविष्य में लोन लेने की क्षमता पर असर पड़ सकता है।
दिन के अंत की प्रक्रिया
हमारे सिस्टम हर दिन के अंत में, दिन के अंत की प्रक्रिया के तहत, लोन खातों का अपने-आप वर्गीकरण करते हैं। SMA या NPA की तारीख़ वह कैलेंडर तारीख़ है जिसके लिए यह प्रक्रिया चलाई जाती है।
इसलिए अगर नियत तारीख़ को दिन के अंत की प्रक्रिया चलने से पहले पूरी देय राशि नहीं मिलती, तो खाता उसी तारीख़ से ओवरड्यू हो जाता है।
उदाहरण। किसी लोन की नियत तारीख़ 31 मार्च है और 31 मार्च की दिन के अंत की प्रक्रिया से पहले पूरी बकाया राशि नहीं मिलती। ओवरड्यू की तारीख़ 31 मार्च है। अगर खाता ओवरड्यू बना रहता है, तो उसे इस तरह चिह्नित किया जाता है:
- 30 अप्रैल की दिन के अंत की प्रक्रिया में SMA-1, लगातार 30 दिन ओवरड्यू रहने के बाद
- 30 मई की दिन के अंत की प्रक्रिया में SMA-2
- 29 जून की दिन के अंत की प्रक्रिया में NPA
अपनी तारीख़ें देखें
वह तारीख़ चुनें जिस दिन EMI देय थी। अगर वह बिना भुगतान के रहती है, तो इन तारीख़ों पर आपके खाते का वर्गीकरण होगा।
खाते का अपग्रेड
SMA वाला खाता सभी ओवरड्यू राशि चुकाने के बाद सामान्य हो जाता है।
NPA के रूप में वर्गीकृत खाता तभी स्टैंडर्ड में अपग्रेड होता है जब ब्याज और मूलधन का पूरा बकाया चुका दिया जाए। बकाया का केवल कुछ हिस्सा चुकाने से खाता अपग्रेड नहीं होता।
उदाहरण। सुनीता का खाता ₹48,000 के बकाये के साथ NPA हो गया। वह सितंबर में ₹30,000 चुकाती हैं। उनका खाता NPA ही रहता है। अक्टूबर में वह बाक़ी ₹18,000 चुकाती हैं, और उनका खाता स्टैंडर्ड में अपग्रेड हो जाता है।
